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लिगामेंट को टूटना या नà¥à¤•सान करना खिलाड़ियों के लिठसिरà¥à¤« à¤à¤• समसà¥à¤¯à¤¾ नहीं है. यह किसी को à¤à¥€ हो सकता है. यह आम तौर पर शरीर के अंगों पर डायरेकà¥à¤Ÿ हिट के कारण होता है. इसका उपचार à¤à¤• साधारण हडà¥à¤¡à¥€ की चोट से कहीं अधिक जटिल है. लिगामेंट चोटिल है या नहीं, इसके जांच करने के लिठअपनी गतिविधियों की जांच करना चाहिà¤. यदि आपने अपने जोड़ को चोटिल किया है और पà¥à¤°à¤®à¥à¤– लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में नहीं रखा है, जैसे कि आप अà¤à¥€ à¤à¥€ वजन कम करने और संयà¥à¤•à¥à¤¤ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤¾à¤‚तरित करने में सकà¥à¤·à¤® हैं, तो हो सकता है कि आपको लिगामेंट की चोटिल हो. यह आपको शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में बहà¥à¤¤ चोट नहीं पहà¥à¤‚चाता है, लेकिन बाद में गंà¤à¥€à¤° हो सकता है.
पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• देखà¤à¤¾à¤² और आतà¥à¤®-उपचार पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ यहां दी गई है:
संरकà¥à¤·à¤£: यह पहली बात है जिसे धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखना है. आपको किसी à¤à¥€ और चोट से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° की रकà¥à¤·à¤¾ करनी चाहिà¤. इस पà¥à¤°à¤•ार, बाहरी समरà¥à¤¥à¤¨ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करना, उदाहरण के लिà¤, घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ के बà¥à¤°à¥‡à¤¸ का उपयोग करें.
रेसà¥à¤Ÿ: पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ जोड़ो को पूरा आराम पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करें. पहले दो या तीन दिनों के दौरान आराम करना चाहिà¤. अगर आपको घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ या टखने के आसपास चोट लग गई है तो बैसाखी सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ की मदद कर सकता है. इसके बाद डॉकà¥à¤Ÿà¤° दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ अनà¥à¤¸à¤¾à¤° अगले कà¥à¤› दिनों या हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ में हलà¥à¤•ी गतिविधि में वापस लौटने की सलाह दी जाती है.
आइस: हर दो से तीन घंटे में लगà¤à¤— 15 से 20 मिनट तक आइस पैक लगाना सबसे अचà¥à¤›à¤¾ विकलà¥à¤ª है. इसे पहले दो से तीन दिनों में दोहराया जाना चाहिà¤.
संपीड़न: किसी à¤à¥€ सूजन और गतिविधि से बचने के लिठचोटिल कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में आवशà¥à¤¯à¤• संपीड़न पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करने के लिठà¤à¤• पटà¥à¤Ÿà¥€ का उपयोग करें. यह चीजों को नियंतà¥à¤°à¤£ से परे नहीं जाने देगा.
ऊंचाई: आपको घायल कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° को उठाया जाना चाहिà¤. सूजन को कम करने के लिठइसे à¤à¤• तकिया पर समरà¥à¤¥à¤¿à¤¤ रखें.
यदि दरà¥à¤¦ असहनीय होता है, तो पेनकिलर जैसे पेरासिटामोल या गैर-सà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‰à¤¯à¤¡ à¤à¤‚टी-इंफà¥à¤²à¥ˆà¤®à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ डà¥à¤°à¤—à¥à¤¸ (NSAIDs) लें. यदि पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• चिकितà¥à¤¸à¤¾ के बाद आपकी हालत में सà¥à¤§à¤¾à¤° नहीं होता है, तो आपको तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° से परामरà¥à¤¶ लेना चाहिà¤.
फिजियोथेरेपी: यह पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ जोड़ो के इलाज के लिठसहायक होता है. यदि पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ जोड़ को सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤¾à¤‚तरित करने में कठिनाई होती है, तो आपको फिजियोथेरेपी का चयन करना होगा.डॉकà¥à¤Ÿà¤° आपको अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ सिखा सकता है जो आपकी मांसपेशियों को मजबूत करेगा और जोड़ो को समरà¥à¤¥à¤¨ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करेगा. इससे आपको दरà¥à¤¦ से छà¥à¤Ÿà¤•ारा पाने में मदद मिलेगी. यह किसी à¤à¥€ शलà¥à¤¯ चिकितà¥à¤¸à¤¾ पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से ठीक होने पर à¤à¥€ फायदेमंद हो सकता है.
सरà¥à¤œà¤°à¥€: यदि फिजियोथेरेपी काम नहीं करती है, तो इसका मतलब है कि आपके पास गंà¤à¥€à¤° लिगामेंट कà¥à¤·à¤¤à¤¿ है. उस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में, आपको उचित आकार में चीजों को सेट करने के लिठशलà¥à¤¯ चिकितà¥à¤¸à¤¾ पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤“ं को लेने की सलाह दी जा सकती है. सरà¥à¤œà¤°à¥€ जोड़ो को खोल कर या आरà¥à¤¥à¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोपी दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ किया जाता है. इसका इलाज करने के लिठविà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार की शलà¥à¤¯ चिकितà¥à¤¸à¤¾ होती है. पहली पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ और सफल शलà¥à¤¯ चिकितà¥à¤¸à¤¾ जिसमें लिगामेंट का कà¥à¤·à¤¤à¤¿à¤—à¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ हिसà¥à¤¸à¤¾ संयà¥à¤•à¥à¤¤ होता है और संयà¥à¤•à¥à¤¤ उप-à¤à¤¾à¤° वाले हिसà¥à¤¸à¥‡ से सामानà¥à¤¯ लिगामेंट से à¤à¤°à¤¾ होता है. दूसरे पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में, à¤à¤¸à¥€à¤†à¤ˆ (ऑटोलॉगस चोंडà¥à¤°à¥‹à¤¸à¤¾à¤‡à¤Ÿ इमà¥à¤ªà¥à¤²à¤¾à¤‚टेशन) दूसरे चरण की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ है जिसमें सà¥à¤Ÿà¥‡à¤® सेल का उपयोग करके चोंडà¥à¤°à¥‹à¤¸à¤¾à¤‡à¤Ÿ उगाया जाता है और दूसरे चरण में दोषपूरà¥à¤£ हिसà¥à¤¸à¥‡ में लगाया जाता है. तीसरा पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° पर डà¥à¤°à¤¿à¤²à¤¿à¤‚ग किया जाता है, जो आमतौर पर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में किया जाता है. यदि आप किसी विशिषà¥à¤Ÿ समसà¥à¤¯à¤¾ के बारे में चरà¥à¤šà¤¾ करना चाहते हैं, तो आप à¤à¤• ऑरà¥à¤¥à¥‹à¤ªà¥‡à¤¡à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ से परामरà¥à¤¶ ले सकते हैं.
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